Elpenor — वह जो ऊँचे सपने तो देखता है, पर कई बार अपनी ही असावधानी से उनसे गिर पड़ता है।
मुझे अपने जीवन में कई Elpenor याद हैं।
हर बार थोड़ा और यक़ीन से सपने बुनता हुआ, और हर बार किसी अदृश्य चूक से उन्हें खोता हुआ।
समय बीतता गया, पर भीतर एक Hiraeth बचा रहा—उस घर, उस समय, उस अपनेपन की स्मृति, जहाँ लौटना अब संभव नहीं था।
शायद इसी भटकन के बीच Acedia ने भी अपना घर बना लिया—आत्मा की वह थकान, जहाँ इच्छाएँ भी धीरे-धीरे अपनी आवाज़ खो देती हैं।
दिन बीतते रहे, पर भीतर कोई हलचल नहीं हुई।
जैसे मैं अपने ही जीवन के किनारे बैठा, उसे दूर से घटित होते हुए देख रहा था।
फिर भी सब कुछ समाप्त नहीं हुआ।
राख, समय और रिक्तताओं के नीचे कुछ Sempiternal बचा रहा—एक ऐसी लौ, जो नित्य नहीं, पर अंतहीन है; जो बुझ-बुझकर भी बनी रहती है।
उसी की क्षीण रोशनी में मैंने अपने बिखरे हुए हिस्सों को फिर से पहचाना।
और जब कई बार लगा कि अब समझौता कर लेना चाहिए, तब भीतर की Intransigence ने धीरे से सिर उठाया—वह अड़ियल जिद नहीं, बल्कि अपने सत्य से न हटने का साहस।
शायद मैं इन्हीं पाँच शब्दों के बीच कहीं खड़ा हूँ —
कुछ सपनों से गिरना,
एक खोए हुए घर को याद करना,
एक लंबे शून्य से गुजरना,
एक बुझती हुई आग को बचाए रखना,
और अंत तक अपने भीतर की रोशनी के पक्ष में खड़ा रहना।
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