सुबह की चाय मीठी होनी चाहिए। रात की कड़वाहट घुल जाती हैं। बेड टी की आदत महीनो पहले छूट चुकी थी। अब चाय की याद भी मुश्किल से आती थी। उन दिनों वह जहां रह रहा था वहां चाय की जगह उबले पानी में कुछ पहाड़ी जड़ी बूटियों को डाल एक शक्तिशाली पेय से दिन की शुरुआत होती थी। दुकान चलाने वाली महिला उसे दुकान में घुसते देख हंसती थी, शायद वह इस पेय को चाय समझ कर पीता था इसलिए। उसकी आवाज मुश्किल से उनलोगो ने सुना होगा और उन्हें ऐसा लगता था कि वह गूंगा हैं। इशारों इशारों में लेन– देन होता था। एक सुबह नारियल के पेड़ वाली उस दुकान में घुसते ही हंसने और उसे लक्ष्य कर बोली गई बात सुनाई दी। यहाँ स्वर्गबाट निर्वासित देवता आउनुहुन्छ। (लो आ गए स्वर्ग का कोई निर्वासित देवता) उनकी बातें सुन वह भी मुस्कुरा पड़ा था। वह थोड़ी बहुत यह भाषा समझता था,पर उन्हें लगता था कि उसे इसकी समझ नही। शायद उसके लिए यह सबसे सटीक पहचान थी। एक खूबसूरत दिल जिसने कभी किसी को पीड़ा नही पहुचाई होगी, आज खुद पीड़े में था। वक्त की साजिशे देख ऐसा लगता था कि सजा का ये सिलसिला कभी खत्म ही नही होग...
हम आंखे खोलते हैं, आंखो को कुछ भा जाती है। मन सोचता है कि काश यह मेरा होता। विचारो द्वारा इच्छाओं का जन्म होता है और घनीभूत होते विचार हमे चाहते ना चाहते उस ओर धकेल देते है। इच्छाओं का जन्म हुआ है तो मृत्यु आवश्य होगा लेकिन इच्छाओं की मृत्यु सहज नहीं होती। इसका पूरा होना ही मृत्यु है चाहे वास्तविकता में पूरा हो चाहे कल्पना में।