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जून, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

संगत और जीवन

मनुष्य जिस संगत में अधिक समय बिताता है, वह अनजाने में उसी जैसा होने लगता है। पहले उसकी भाषा बदलती है, फिर सोच, और अंत में उसे अपने भीतर हो रहे बदलाव भी सामान्य लगने लगते हैं। मैंने देखा है कि बुरी संगत इंसान को एक दिन में नहीं बदलती। वह धीरे-धीरे उसकी संवेदनशीलता कम करती है। गलत बातों पर भीतर उठने वाली बेचैनी को खत्म कर देती है। फिर एक समय ऐसा आता है जब वही गलत चीज़ें आदत बन जाती हैं। सबसे खतरनाक बात यह है कि इंसान को अपना पतन, पतन जैसा लगना ही बंद हो जाता है। उसे लगता है कि यही उसका स्वभाव है। और अब मुझे लगता है कि संगत सिर्फ लोगों की नहीं होती — विचारों की भी होती है, भीड़ की भी, और उस वातावरण की भी, जहाँ सत्य से अधिक सुविधा को महत्व दिया जाता है। Avinash Pandey 

कुछ रातें

Pain of Discipline or pain of Regret

डियर युवा, जीवन में आपको दो तरह के दर्द में से किसी एक दर्द का चुनाव करने पड़ेंगे। एक अनुशासन ( Discipline) का दर्द और दूसरा पछतावा( Regret ) वाली दर्द। अनुशासन वाली दर्द लिमिटेड होगी और दिन पर दिन कम होती जाएगी पर ये पछतावा वाली दर्द इसके उल्टा दिन पर दिन बढ़ते जाएगी।  तय आपको करना है कि कौन सा दर्द आप चुनेंगे।

Elpenor

Elpenor — वह जो ऊँचे सपने तो देखता है, पर कई बार अपनी ही असावधानी से उनसे गिर पड़ता है। मुझे अपने जीवन में कई Elpenor याद हैं। हर बार थोड़ा और यक़ीन से सपने बुनता हुआ, और हर बार किसी अदृश्य चूक से उन्हें खोता हुआ। समय बीतता गया, पर भीतर एक Hiraeth बचा रहा—उस घर, उस समय, उस अपनेपन की स्मृति, जहाँ लौटना अब संभव नहीं था। शायद इसी भटकन के बीच Acedia ने भी अपना घर बना लिया—आत्मा की वह थकान, जहाँ इच्छाएँ भी धीरे-धीरे अपनी आवाज़ खो देती हैं। दिन बीतते रहे, पर भीतर कोई हलचल नहीं हुई। जैसे मैं अपने ही जीवन के किनारे बैठा, उसे दूर से घटित होते हुए देख रहा था। फिर भी सब कुछ समाप्त नहीं हुआ। राख, समय और रिक्तताओं के नीचे कुछ Sempiternal बचा रहा—एक ऐसी लौ, जो नित्य नहीं, पर अंतहीन है; जो बुझ-बुझकर भी बनी रहती है। उसी की क्षीण रोशनी में मैंने अपने बिखरे हुए हिस्सों को फिर से पहचाना। और जब कई बार लगा कि अब समझौता कर लेना चाहिए, तब भीतर की Intransigence ने धीरे से सिर उठाया—वह अड़ियल जिद नहीं, बल्कि अपने सत्य से न हटने का साहस। शायद मैं इन्हीं पाँच शब्दों के बीच कहीं खड़ा हूँ — कुछ सपनों से गिरना, एक ...