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मै कुछ कहना चाहता हूँ —सुनोगे?

मै कुछ कहना चाहता हूँ - सुनोगे? 
पहले मै बातूनी था। जीभ ओवरटाइम करता था और दिमाग हड़ताल पर चला जाता था। 
फिर चुप हो गया। 
इस चुप और बातूनी के बीच हमेशा संघर्ष चलता रहता था।
एक दिन इन दोनों के बीच सुलह हो गया।
अब मैं दोनों के मध्य बैठ कर कुछ बोलना चाहता हूँ - सुनना पड़ेगा वरना मैं भी नहीं सुनूंगा।
कुछ लोगों का हमेशा मेरे से एक शिकायत रहती हैं - फोन नहीं करते, उठाते नहीं। पास बैठो तो जल्दी भाग जाते हो। पता चलता हैं कि घर में हो और मिलते नहीं? तुम पकड़ाते ही नहीं?
अब क्या बोलूं कि जब भी फोन उठाओ - आप सुनाने लगते हो अपनी कथा। जब भी पास बैठो - आपको अपनी सुनाने के अलावा दूसरे का सुनना आता नहीं। 
आखिर जब सुनने का ही ऑप्शन हैं तो बेस्ट क्यों न सुने? 
#joerogan को क्यों ना सुने, Dairy of a CEO क्यों ना सुने? 
क्यों न सुने #RottenMango को और #modernwisdompodcast को? 
तो भाई साहब हमने कोई ठेका नहीं ले रखा हैं आपके #हैलुसिनेशन और #डिसीज़_ऑफ_मी का! 
अगर आपको कुछ बोलना हैं तो सुनना भी पड़ेगा।

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