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ऐंकरिंग इफेक्ट्स

मैच शुरू होने से पहले रोनाल्डो का वह ऊँचा जंप।
माइकल फेल्प्स का पानी में उतरने से पहले किया गया रिवर्स फ्लैप।
मुहम्मद अली की आवाज़— “I am the greatest.”
और उसेन बोल्ट का लाइटनिंग पोज़।
ये शो ऑफ नहीं हैं।
ये मानसिक स्टार्ट बटन हैं।
इसे कहते हैं — Anchoring Effect।
सुपर एथलीट्स जानते हैं कि दिमाग को हर बार मोटिवेट नहीं किया जाता, उसे प्रोग्राम किया जाता है।
क्लासिक कंडीशनिंग पर हुए प्रयोग बताते हैं कि जब आप किसी खास भावना को बार-बार किसी खास ट्रिगर से जोड़ते हैं, तो कुछ समय बाद वह ट्रिगर अकेले ही वही भावना जगा देता है।
जैसे स्विच ऑन करते ही लाइट जलती है।
माइकल फेल्प्स कहते हैं — रिवर्स फ्लैप के बाद सब कुछ ऑटोमैटिक हो जाता है।
मतलब?
रिचुअल खत्म, मशीन शुरू।
आप भी अपना “सक्सेस स्विच” बना सकते हैं — सिर्फ 3 स्टेप में:
1. Choose your emotion
कौन सी फीलिंग चाहिए? कॉन्फिडेंस? फोकस? आक्रामक ऊर्जा?
2. Choose your trigger
कोई पोज़, कोई शब्द, कोई गाना, कोई खास हैंड जेस्चर।
3. Practice Emotion + Trigger
बार-बार उसी भावना को उसी ट्रिगर के साथ जोड़िए।
दिमाग इसे लिंक कर लेगा।
फिर एक दिन —
स्टेज पर जाने से पहले, पढ़ाई करने से पहले, एक्सरसाइज करने से पहले, इंटरव्यू से पहले, मैच से पहले —
आप ट्रिगर करेंगे…
और अंदर से वही पावर अपने आप उठेगी।
क्योंकि चैंपियंस इंतज़ार नहीं करते कि मूड आए।
वे अपना मूड बनाते हैं।
Avinash Pandey 

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