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│ 24 जनवरी 2016 │
│ अविनाश पाण्डेय │
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│ आज मैंने एक बात बड़े जोर से महसूस की — │
│ ज़िंदगी में स्पष्ट होना कितना जरूरी है। │
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│ निर्णय लेना आसान नहीं होता हैं। │
│ कई बार उसकी कीमत चुकानी पड़ती है — │
│ रिश्ते टूट जाते हैं, मौके निकल जाते हैं, लोग आपको गलत समझते हैं।
│ लेकिन जब भीतर का शोर थमता है, │
│ तब महसूस होता है — यही सही था। │
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│ स्पष्ट मन से लिए गए फैसले │
│ हमेशा सुकून देते हैं। │
│ और यही सुकून भरा मन │
│ सही सोच और सही परिणाम देता है। │
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│ फाइनेंस ने भी एक सबक सिखाया — │
│ पैसा चाहे जैसा हो– जिसका हो, पैसे का स्वभाव है, खर्च होना।
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│ सबसे बड़ा सबक — │
│ उधार मत लो │
│ जब तक हालात जान लेने की नौबत न बना दे। │
│ उधार की ज़िंदगी का कंपाउंडिंग तेज़ होता है │
│ और decay भी उतना ही तेज़। │
│ एक बार इस जाल में फँस गए, │
│ निकालना आसान नहीं। │
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│ आज के लिए बस इतना ही– │
│ उमड़ते घुमड़ते विचारों को बाहर फेंक │
│ अब सोते हैं हिप्टोनाइज़ के साथ। │
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