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कही ईश्वर चुप ना हो जाए

मैं गलत करने से इसीलिए बचता हूँ
कि ईश्वर नाराज़ होकर मुझे दंड देगा—ऐसा नहीं।
मैं बचता हूँ इसलिए
कि कहीं उसे बुरा न लगे।

उसने मेरे भीतर एक भरोसा बोया है,
एक यक़ीन कि मैं अंधेरे में भी
उसके दिए उजाले को थामे रहूँगा।

अगर मैंने उस भरोसे को तोड़ दिया,
तो शायद वह चुप हो जाएगा—
और उसकी वह चुप्पी
मेरी सबसे बड़ी सज़ा होगी।

— अविनाश पाण्डेय

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