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तुम्हारे पीठ पर लिखा मेरा नाम

मैं अभी भी वहीं हूँ - उसी मोड़ पर जहां से हवाएं तुम्हें अपने गोद में उठाए भाग चली थी। ये हवा भी तो तुम्हे कितना प्यार करती है और तुम उसके साथ तितलियों की भांति नीले आसमान, रंगबिरंगे फूलों में खो जाते हो। भूल जाते हो कि कोई पीछे छूटा जा रहा। मै पिछे-पिछे दौड़ता तो हूं मगर हवाओं का मुकाबला कर नहीं पाता। फिर थक कर ठहर जाता हूं।
समय से अपनी कभी जमी नही। हमेशा यह मुझे पीछे छोड़ देता है ताकि अपनी अवास्तविकता को साफ कर आगे बढू। यह समय भी तुम्हे काफी प्यार करता है, कभी अकेला नहीं छोड़ता तुम्हें, हमेशा अपनी कंधो पर बिठाए रखता हैं। 
शुरू में कभी जब तुम मुझे अकेला छोड़ आगे बढ़ जाते थे तब रास्तों की सूनापन डराते थे। रास्ता सूझता नहीं था। 
मगर एक जगह है जो बहुत खूबसूरत है। गिरते पड़ते मै यहां तक पहुंच चुका हूं। मालूम नहीं तुम कितनी दूर जा चुके हो! मेरी याद आती हैं ये भी मालूम नहीं! कभी रुकोगी मेरे इंतज़ार में? मालूम नहीं। 
  लेकिन अब मैं उदास नहीं हूं। यह स्थान मेरा सपोर्ट है - जैसे स्टॉक मार्केट का कोई शेयर लाख बाहरी दबाव के बावजूद भी उस स्थान पर डटे रहता हैं और वही से आगे की यात्रा करता हैं। मै भी वही शेयर हूं जिसका सपोर्ट इसी जगह हैं। अब मैं यहां अपने सुरक्षित स्थान के रूप में जी रहा हूं- न कि उस अंधेरी मोड़ पर, जिसने मुझे तोड़ने की कोई कसर नहीं छोड़ी थी। 
मैं बहुत पीछे हूं! लेकिन धीरे-धीरे सीख रहा हूं कि दर्द का सामना कैसे करना है - चीजों में बेहतर की तलाश करना भी सीख रहा हूं। दुनिया अब बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रही है। समय का अंतराल मेरे चेतन में बढ़ चला हैं। एक- एक पल जैसे महीनों जितना लंबा हो चले हैं। मै उस अंतराल के भीतर जी रहा हूं और अब मैं बिना किसी चिंता के मुस्कुरा सकता हूं।  मेरे सिर में पहले की तरह आवाजें तेज नहीं हैं - अब कोई निशान और सूजी हुई आंखें दिख नहीं रही हैं। अब मै तुम्हारी छाया को नहीं पकड़ा हूँ।  तुम्हारी खुशी के लिए जाने दे रहा हूं, इसलिए कृपया कभी पीछे मुड़कर मत देखना। पीछे भी मत आना। मैं अभी भी यहीं हूँ - लेकिन यहाँ हमेशा के लिए नहीं रह रहा हूँ।  जल्द ही मुझे एक और जगह मिल जाएगी- जहां की ताजगी एक नए सफर के लिए मुझे तैयार कर तेज़ दौड़ाएगी। संभव है तुम्हारे पीछे आकर अपनी हाथो से तुम्हारी आंखें बंद कर  तुम्हे चौका डालू! 
© अविनाश पांडेय

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