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The Brighter the light the deeper the shadow

Once Upon a Time. There Was The Brighter the light and the Deeper the shadow.
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रास्ते जानें पहचानें है लेकिन पैर थके मांदे हैं। सफर कुछ कदमों पर रुका सा है जैसे कही जाना नही चाहता हो। 
बिना चिड्डियो वाली आकाश हैं। थकी– उलझी शाम बेरंग सा वक्त के साथ घसीटे जा रही, जैसे रात में गुम हो दिन को भूलना  चाहती हो।  
शाम को लेकर मेरा निश्चित मत था कि शाम से ज्यादा दिलकश कुछ भी नही। दर्द और प्रेम से भीगी हुई... बिछड़ने का गाढ़ा रंग। 
 ढलते हुए सूरज भगवान का आहिस्ते आहिस्ते खोते जाना... चिड़ियों वाली आकाश, चिड्डियो का घर लौटना और थके मांदे उजालों का अंधेरों के आगोश में जाना।
वक्त वक्त की बात हैं और इसी वक्त में से निकल कर 
कुछ घंटे कोलाहल और निरवता के बीच चुपके से बैठ गए हैं।
 ट्रैफिक का शोर घर जाने को बेचैन हैं। चकाचौंध वाली सड़के आगे चल कर अतीत की परछाई लिए सुनी सड़को में तब्दील होते जा रही हैं।
इसी सड़क पर आगे चल कर वो जगह आती है। शहर को शहर से माइनस कर देने वाली जगह। लोग अपनी अपनी एकांत से मिलने यहीं पर आते हैं। 
रात में यह जगह आकाश को अपने अंदर समा लेता हैं। इतना बड़ा दिल की अंदर से चांद तारे झांक रहे होते हैं। 
उस हरे भरे जगह में टायर जलने की महक फैली हुई हैं।
 हजारों मील की यात्राओं में साथ चलने वाला टायर  आज जल रहा हैं। अच्छी बुरी यात्राओं में शामिल रहा वो टायर उन्हे याद कर रहा होगा जिनके इशारों पर चढ़ाई चढ़ता था, नीचे उतरता था। क्या चलाने वाले को याद होगा ?
 जलते जलते भी ठंड का सहारा बन रहा हैं। जलना किसी को भी अच्छा नहीं लगता, टायर को भी अच्छा नहीं लग रहा। बदबू का फैल जाना इसी का संकेत हैं।
सामने एक के बाद एक, दो पेड़ हैं, जो ठीक मेरे सीध में है। पेड़ को रोज आश्चर्य होता हैं कि कोई खाली बैठे करता क्या हैं? सोने के समय यहां बैठता कौन हैं।
 गांव की झुर्री वाली औरते जैसे बेवक्त किसी को देख हैरान होती है फिर अपनी किवाड़ बन्द कर लेती हैं, ठीक वैसे ही पेड़ भी नजरे मोड़ चिड्डियो को सुलाने में लग जाता हैं।
यह पेड़ हुबहू उस पेड़ जैसा ही हैं। पत्तो से हरा–भरा, जिससे एक यात्रा के दौरान मैं मिला था। सीना ताने अकेला खड़ा। दूर दूर तक उसके अलावा कोई दूसरा पेड़ नही था। 
बाद की वर्षो के मुलाकात में देखा की वह पेड़ निःशब्द बिना पत्तियों के ठंड में ठिठुरता खड़ा हैं। मालूम नही की पत्तियों के चले जाने से दुखी है या बिना पछतावा के खड़ा हैं। इस बार  कुछ बोला नहीं था।
जिंदगी के नियम बड़े उल्टे होते हैं। हम ऊपर जाना चाहते हैं नीचे गिरा दिए जाते हैं। नीचे रहना स्वीकारते है और एक दिन पाते हैं की सबसे ऊपर आ चुके हैं।
आगे वाला पीछे हो जाता हैं और पीछे वाला आगे।
जिंदगी को सीधे तर्क में कभी भरोसा नहीं रहा।
हम जिंदगी के राह पर ऐसे चलते है जैसे हाईवे पर चल रहे हो। सीधा चौड़ा रास्ता। 
लेकिन जिंदगी का कोई रास्ता सीधा नही होता।
जैसे पहाड़ियों के अंदर रास्ते होते हैं, जिंदगी के सब रास्ते वैसे ही गोल घुमावदार होते हैं।
वर्षो पहले की एक रात मैं पहाड़ वाली रास्तों पर  रोमांचित सा चल रहा था। सामने चांद दिख रहा था। ऐसा लग रहा था जैसे कुछ दूर और चलूं और फिर सीधा चांद पर पहुंच जाऊंगा। लेकिन दो घड़ी बाद वही रास्ता गोल घूम गया और चांद के तरफ मेरा पीठ हो गया।
जिंदगी के पास हर एक के लिए उसका खुद का रास्ता है। इस रास्ते पर कैसे चलना है, ये कोई और नहीं बता सकता। ना दोस्त , ना मां बाप परिवार पत्नी बच्चे। 
इस रोमांचकारी अनिश्चित रास्तों पर अकेला ही गुजरना होता हैं। हर एक कदम आगे का रास्ता कैसा होगा, यह तय करती हैं। 
बड़ी डरावनी यात्रा हैं यह। 
  सच्चे जीवन की राहों में असफलताएँ अधिक हैं।  संभावना है कि आप अपने आप को रोज खोते हुए अकेला पाएंगे और विशाल परिदृश्यों और गहरे जंगलों की खामोशी में चिल्लाएंगे! जहां आपकी आवाज वापस आपसे ही टकराएगी और कुछ समझ नहीं पाएंगे। 
 संभावना है कि आप के पास जो ज्ञान हैं, वह बेकार साबित होगा और आप खुद को मूर्ख की तरह नाचते हुए पा सकते हैं।
 सब जमा की हुई धारणाओं को ढहते पाएंगे जो दर्द देगा।  सबसे दर्दनाक बात, हर पल कुछ ना कुछ खोते पाएंगे।
एक सच्चे जीवन जीने की यात्रा लंबी है और हर दिन आप खुद को और अधिक झूठ और दर्द के साथ पाएंगे।
लेकिन मैं एक बात के लिए निश्चित कर सकता हूं की अनिश्चिताओ को स्वीकार करने के साथ ही रास्ते आसान हो जाते हैं। चाहें रो कर चाहें हंस कर चलना तो इसी रास्ते पर हैं जिसपर पांव दुखते हैं।

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