┌───────────────────────────── Untitled - Notepad ───────────────────────────┐ │ 24 जनवरी 2016 │ │ अविनाश पाण्डेय │ │ │ │ आज मैंने एक बात बड़े जोर से महसूस की — │ │ ज़िंदगी में स्पष्ट होना कितना जरूरी है। │ │ │ │ निर्णय लेना आसान नहीं होता हैं। │ │ कई बार उसकी कीमत चुकानी पड़ती है — │ │ रिश्ते टूट जाते हैं, मौके निकल जाते हैं, लोग आपको गलत समझते हैं। │ लेकिन जब भीतर का शोर थमता है, │ │ तब महसूस होता है — यही सही था। ...
अविनाश पाण्डेय सड़क और यादें –––––––––– कभी एक सड़क थी, धूल भरी, धूप में झुलसती, और हर कदम पर छोटे-छोटे कदमों की गूँज भर देती। उस सड़क के किनारे एक इकलौता पेड़ खड़ा रहता, उसकी छाया में हम घंटों बैठा करते। उसके पास एक आम का पेड़ भी था, जो हमेशा ताड़ की ऊँचाई को चुनौती देता। मैं अक्सर कहता — “अगर इसे सीधा कर दिया जाए, ताड़ से बड़ा हो जाएगा।” कभी दोपहरी, कभी शाम, रोज़ एक लड़की लंगड़ाकर उस रास्ते से आती-जाती। आँखों में खामोशी, नजर जमीन पर, और मन में पैर की कसक। मेरा दोस्त सहानुभूति से लेकिन पूर्ण विश्वास के साथ कहता — “अगर मेरा वस चले, मैं उससे शादी करू।” मेरे लिए उसकी यह बात सुनना, किसी अजूबे से कम नहीं था। समय ने सब बदल दिया। सड़क अब चमचमाती है, पेड़ गायब हैं, लड़की कहीं और है, और दोस्त शायद भूल चुका है कि उसने यह कहा था। मैं आज भी जब कभी आम और ताड़ का पेड़ एक साथ देखता हूँ, मन ही मन मापना शुरू कर देता हूँ — आम या ताड़, कौन बड़ा? कभी-कभी, धुंधली याद में, मुझे लगता है कि वह सड़क फिर से धूल भरी है, पेड़ झूमते हैं, लड़की गुजरती है, और दोस्त दुनिया को दिखाना चाहता है कि वो लड़की बाहर से लंगड...